कहानी बदलाव की : 25 एकड़ अतिक्रमण मुक्त भूमि बनी महिलाओं की समृद्धि का आधार

अमरूद की बागवानी और अंतर-फसली खेती से हरियाली स्व सहायता समूह की 14 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर
सारंगढ़। ग्राम सुखापाली, तहसील सरिया में लंबे समय से अतिक्रमण की चपेट में रही करीब 25 एकड़ शासकीय भूमि आज महिला स्व सहायता समूह की आजीविका, आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि का आधार बन रही है। राजस्व विभाग की पहल से अतिक्रमण मुक्त कराई गई इस भूमि को योजनाओं के अभिसरण और महिलाओं की मेहनत से एक मॉडल फार्म के रूप में विकसित किया गया है। हरियाली स्व सहायता समूह की 14 महिला सदस्य अब इसी भूमि पर खेती और बागवानी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने के साथ ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
ग्राम सुखापाली में करीब 25 एकड़ शासकीय भूमि लंबे समय से अतिक्रमित थी। तहसील सरिया के राजस्व अमले ने ग्राम पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन के समन्वय से कार्रवाई करते हुए भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया और पुनः शासन के आधिपत्य में लिया। इसके बाद इस भूमि का उपयोग महिला समूह की आजीविका संवर्धन के लिए किया गया। अलग-अलग योजनाओं को आपस में जोड़कर भूमि को खेती और बागवानी के लिए तैयार किया गया, जिससे एक ऐसी व्यवस्था विकसित हुई जिसमें शासकीय भूमि की पुनर्प्राप्ति के साथ महिला समूह के लिए स्थायी आय के अवसर भी तैयार हुए।

वीबीग्रामजी के अंतर्गत भूमि समतलीकरण और शेड निर्माण कराया गया, वहीं डीएमएफ मद से फेंसिंग, चैन-लिंकिंग और आधुनिक ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही सीएलएफ के माध्यम से 10 लाख रूपए की ऋण सहायता उपलब्ध कराई गई। इस राशि से वीएनआर और पिंक ताइवान किस्म के करीब 7 हजार 300 अमरूद पौधों का रोपण किया गया। अमरूद की बागवानी तैयार होने के साथ आने वाले समय में समूह की महिलाओं के लिए आय का एक स्थायी स्रोत विकसित होने लगा है।
अमरूद के पौधों से फल प्राप्त होने तक महिलाओं की आय प्रभावित न हो, इसके लिए समूह ने अंतर-फसली खेती को अपनाया। करीब 25 एकड़ भूमि में खीरा, लौकी और मखना जैसी फसलों का उत्पादन शुरू किया गया। स्थानीय बाजार में इन फसलों की बिक्री से महिलाओं को नियमित और तत्काल आय प्राप्त होने लगी। इस तरह एक ही भूमि पर दीर्घकालिक बागवानी के साथ अल्पकालिक फसलों का उत्पादन कर आय के निरंतर स्रोत की व्यवस्था की गई है।
हरियाली स्व सहायता समूह की महिलाओं के लिए यह बदलाव केवल खेती शुरू करने तक सीमित नहीं है। जिस शासकीय भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण था, वही भूमि आज उनके श्रम, योजनाओं के अभिसरण और सामूहिक प्रयास से आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है। राजस्व विभाग की अतिक्रमण हटाने की पहल ने शासकीय भूमि को पुनः शासन के आधिपत्य में लाने के साथ उसे ग्रामीण महिलाओं की आजीविका से जोड़ने का रास्ता तैयार किया। योजनागत सहायता, आधुनिक सिंचाई, बागवानी और अंतर-फसली खेती के माध्यम से समूह की महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं और ‘लखपति दीदी’ बनने के अपने लक्ष्य को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।




