रायपुर

“यह सम्मान मेरे अग्रज संपादकों और पत्रकार साथियों का है” : लक्ष्मीनारायण लहरे ‘साहिल’

श्रेष्ठ पत्रकार सम्मान-2026 से सम्मानित होंगे वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार लहरे

रायपुर। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार लक्ष्मीनारायण लहरे ‘साहिल’ को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘श्रेष्ठ पत्रकार सम्मान-2026’ से सम्मानित किया जाएगा। रायपुर साहित्य सृजन संस्थान के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर 23 अगस्त को वृंदावन हॉल, सिविल लाइन्स में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

करीब 26-27 वर्षों से पत्रकारिता एवं हिंदी साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय लहरे ने इस सम्मान को अपने अग्रज संपादकों और पत्रकार साथियों को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि उन सभी संपादकों और पत्रकार साथियों का सम्मान है, जिन्होंने वर्षों तक उन्हें मार्गदर्शन और अवसर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार धर द्विवेदी से बातचीत में लहरे ने कहा कि पत्रकारिता उनके लिए महज पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व है। एक पत्रकार को निष्पक्ष, निर्भीक और जनपक्षधर होकर समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सच को सच कहना ही सबसे बड़ा साहस है।

साहित्य के क्षेत्र में ‘साहिल’ उपनाम से सक्रिय लहरे ने पत्रकारिता और साहित्य को समाज निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके अनुसार पत्रकारिता तथ्यों के माध्यम से समाज को जगाती है, जबकि साहित्य संवेदना के माध्यम से समाज को जोड़ता है। दोनों का उद्देश्य बेहतर समाज और नैतिक चेतना का निर्माण होना चाहिए।

अपने साहित्यिक सफर का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें छत्तीसगढ़ काव्य रत्न, काव्य श्री, काव्य गौरव, साहित्य कला रत्न एवं दबंग हिंदी सेवा सम्मान सहित विभिन्न सम्मानों से नवाजा जा चुका है। हालांकि वे मानते हैं कि किसी खबर के माध्यम से जरूरतमंद को न्याय मिलना और किसी कविता का पाठक के हृदय को छू जाना ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

23 अगस्त को होने वाले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को लेकर उन्होंने साहित्य सृजन संस्थान के अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य को जीवंत रखने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी जिम्मेदारी को और बढ़ाता है तथा वे आगे भी पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से समाज की सेवा के लिए सक्रिय रहेंगे।

युवा पत्रकारों और नवोदित साहित्यकारों को संदेश देते हुए लहरे ने कहा कि सफलता के लिए शॉर्टकट की तलाश नहीं करनी चाहिए। भाषा पर पकड़, निरंतर अध्ययन, धैर्य और जमीन से जुड़ाव ही पत्रकारिता और साहित्य में पहचान बनाने का आधार है। “सम्मान पीछे-पीछे आते हैं, पहले साधना जरूरी है।” उन्होंने युवाओं से ईमानदारी और निरंतर अभ्यास के साथ अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

Related Articles

Latest