रेडियो श्रोता दिवस आज : श्रोताओं के समर्पण और सम्मान का दिन

रायपुर। रेडियो और उसके श्रोताओं के आत्मीय रिश्ते को समर्पित ‘रेडियो श्रोता दिवस’ 20 अगस्त को मनाया जाएगा। भारत में रेडियो प्रसारण के इतिहास में 20 अगस्त का विशेष महत्व है। वर्ष 1921 में इसी दिन पहली बार श्रोताओं के पत्रों को रेडियो पर प्रसारित किया गया था। इसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में छत्तीसगढ़ के रेडियो श्रोताओं ने वर्ष 2006 से 20 अगस्त को ‘श्रोता दिवस’ के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की।
रेडियो की लोकप्रियता और प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ उद्घोषक प्रकाश उदय ने कहा कि श्रोताओं की भागीदारी के बिना रेडियो की प्रासंगिकता अधूरी है। टेलीविजन और निजी चैनलों के बढ़ते प्रभाव के दौर में रेडियो के सामने कई चुनौतियां आईं, लेकिन एफएम तकनीक के आगमन ने रेडियो प्रसारण को नई ऊर्जा दी। बेहतर ध्वनि गुणवत्ता के कारण एफएम ने बड़ी संख्या में श्रोताओं को आकर्षित किया।
उन्होंने कहा कि आज भी रेडियो समाज के विभिन्न वर्गों से सीधे जुड़ा हुआ है। गांवों में रहने वाले किसान, खेत-खलिहानों में काम करने वाले श्रमिक, रिक्शा-ठेला चालक, फैक्ट्री कर्मचारी, वाहन चालक, विद्यार्थी, शिक्षक और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोग रेडियो को अपने जीवन का साथी मानते हैं। यही आम श्रोता रेडियो की सबसे बड़ी ताकत हैं।
आंचलिक भाषाओं से मजबूत हुआ जुड़ाव
आकाशवाणी की लोकप्रियता में आंचलिक भाषाओं और बोलियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आकाशवाणी रायपुर से छत्तीसगढ़ी में होने वाला प्रसारण स्थानीय श्रोताओं के बीच विशेष लोकप्रिय है। इसी तरह देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय भाषाओं और बोलियों में कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं, जिससे रेडियो का आम जनता से सीधा जुड़ाव बना हुआ है।
बदलते दौर में बदलाव जरूरी
प्रकाश उदय ने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण रेडियो के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। आज श्रोता कम समय में अधिक जानकारी चाहते हैं। ऐसे में रेडियो कार्यक्रमों के पारंपरिक स्वरूप की समीक्षा कर उनमें समयानुकूल बदलाव और नवाचार की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि श्रोताओं के सुझावों और मांगों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रमों में आवश्यक परिवर्तन किए जाने चाहिए। रेडियो की सहजता, विश्वसनीयता और आम जनता से उसका आत्मीय रिश्ता ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। श्रोताओं की भागीदारी और विश्वास के साथ रेडियो भविष्य में भी अपनी मजबूत पहचान बनाए रख सकता है।
— प्रकाश उदय, वरिष्ठ उद्घोषक, आकाशवाणी रायपुर




