राजनांदगांव में स्व. कमला वैष्णव की द्वितीय पुण्यतिथि सम्पन्न…

अब हर जिला के वैष्णव भवन में स्थापित होगी ममतामयी मां कमला की प्रतिमा…
साजिश नहीं, दम है तो चुनावी अखाड़े में हराकर दिखाएं विरोधी- लखन दास
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ वैष्णव महासभा की पूर्व राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष स्व. श्रीमती कमला वैष्णव की द्वितीय पुण्यतिथि के पावन अवसर पर संस्कारधानी राजनांदगांव में एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस भावपूर्ण एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम में पूरे प्रदेश से वैष्णव समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी, मातृशक्ति और युवा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने स्व. कमला वैष्णव के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर समाज निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान को नमन किया।
सभा में वक्ताओं ने स्व. कमला वैष्णव के त्याग और कार्यों को मुक्तकंठ से याद किया। समाजजनों ने रेखांकित किया कि किस तरह उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन छत्तीसगढ़ में वैष्णव समाज को एक सशक्त पहचान दिलाने, बिखरे हुए समाज को सूत्रबद्ध करने और सामाजिक न्याय दिलाने में खपा दिया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी, निर्धन वैष्णव परिवारों व बालिकाओं की शिक्षा में सहायता की और समाज हित के लिए अपनी संपूर्ण व्यक्तिगत संपत्ति तक समर्पित कर दी।
कार्यक्रम के दौरान स्व. कमला वैष्णव की मूर्ति स्थापना का कुछ अन्य संगठनों द्वारा दुर्भावनापूर्ण विरोध किए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा, जिसे लेकर छत्तीसगढ़ वैष्णव महासभा के पदाधिकारियों व सदस्यों में भारी आक्रोश देखा गया।
मंच से ललकारते हुए राष्ट्रीय महासचिव ने विरोधियों को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा, “कमला देवी ने अपना सर्वस्व वैष्णव समाज के स्वाभिमान और सेवा में लगा दिया। कुछ मुट्ठी भर षड्यंत्रकारियों द्वारा दुर्भावनापूर्वक किए गए विरोध के कारण समाज ने मर्यादा का परिचय देते हुए स्वेच्छा से मूर्ति हटाई थी, यह हमारी कमजोरी नहीं बल्कि हमारा बड़प्पन था। अगर किसी विरोधी में तनिक भी दम है, तो वे चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबला करें और जीतकर दिखाएं।”
वैष्णव समाज के इस चट्टानी संकल्प और अभूतपूर्व एकजुटता को देखकर विरोधियों के हौसले पस्त नजर आए। श्रद्धांजलि सभा में महासभा के सदस्यों ने सामूहिक संकल्प (प्रण) लिया कि अब छत्तीसगढ़ में जहां-जहां भी वैष्णव महासभा का भवन निर्मित होगा, वहां पूरी गरिमा व सम्मान के साथ ममतामयी मां स्व. कमला वैष्णव की प्रतिमा अनिवार्य रूप से स्थापित की जाएगी। सभा का समापन समाज की एकता और स्वाभिमान को अक्षुण्ण रखने के जयघोष के साथ हुआ।

