प्रांजल दिव्यांग स्कूल में मना ‘आक्रामकता के शिकार मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस’, बच्चों को सिखाया ‘अच्छा-बुरा स्पर्श’

सारंगढ़। जिला मुख्यालय स्थित प्रांजल दिव्यांग विशेष स्कूल में 4 जून को ‘आक्रामकता के शिकार हुए मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस’ सामाजिक कार्यकर्ता एवं संस्था प्रमुख श्रीमती हिरा देवी निराला के मार्गदर्शन और विशेष शिक्षक प्रांजल की उपस्थिति में मनाया गया। कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों को सुरक्षा और आत्मरक्षा की सीख दी गई।
कार्यक्रम की मुख्य बातें
श्रद्धांजलि से शुरुआत: कार्यक्रम की शुरुआत युद्ध, हिंसा, शोषण और तस्करी का शिकार हुए दुनिया भर के मासूम बच्चों को 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।

संस्था प्रमुख का संदेश: श्रीमती हिरा देवी निराला ने कहा, “दिव्यांग बच्चे समाज का सबसे संवेदनशील हिस्सा हैं। मारना, डांटना, तुलना करना या नजरअंदाज करना भी आक्रामकता के रूप हैं। 4 जून हमें याद दिलाता है कि हर बच्चे को डर-मुक्त बचपन देना हमारा कर्तव्य है।”
सुरक्षा की पाठशाला: विशेष शिक्षक प्रांजल ने ‘अच्छा स्पर्श-बुरा स्पर्श’, ‘ना कहना सीखो’ और ‘विश्वास वाले व्यक्ति को बताओ’ जैसे विषयों पर गतिविधि कराई। दृष्टिबाधित, मूक-बधिर और मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए ब्रेल शीट, चित्र कार्ड और कठपुतली का प्रयोग किया गया।
बच्चों का संकल्प: बच्चों ने “हमें प्यार चाहिए, मार नहीं” और “चुप नहीं रहेंगे, बात बताएंगे” जैसे नारे लगाकर जागरूक रहने का संकल्प लिया।
खास गतिविधियां:
- सुरक्षा का पेड़: बच्चों ने रंगीन कागज पर हाथ की छाप लगाकर ‘सुरक्षा का पेड़’ बनाया और किसी को चोट न पहुंचाने की शपथ ली।
- नुक्कड़ नाटक: विशेष शिक्षकों ने ‘चुप्पी तोड़ो’ नाटक के जरिए बताया कि डरने की बजाय अपनी बात शिक्षक या माता-पिता को बताना जरूरी है।
क्या है 4 जून का महत्व
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 अगस्त 1982 को प्रतिवर्ष 4 जून को ‘आक्रामकता के शिकार हुए मासूम बच्चों का अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य युद्ध, शारीरिक-मानसिक शोषण और तस्करी से पीड़ित बच्चों के दर्द को दुनिया के सामने लाना है।
कार्यक्रम के अंत में बच्चों को मिठाई और उनकी पसंद के चिप्स खिलाकर खुशियां बांटी गईं।




