साहित्य सृजन के स्थापना दिवस पर सजा काव्य का रंग, कवियों ने बांधा समां

‘अक्स जिंदगी के’ गीत संग्रह का विमोचन, वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे और सामाजिक कार्यकर्ता हीरा देवी निराला सम्मानित
रायपुर। साहित्य सृजन संस्थान, रायपुर का पंचम स्थापना दिवस शनिवार 23 अगस्त को स्थानीय वृंदावन हॉल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे ख्यातिनाम कवियों ने गीत, गजल और कविताओं की ऐसी मनमोहक प्रस्तुति दी कि देर शाम तक सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्य सृजन संस्थान के संरक्षक एवं पूर्व आईएएस डॉ. संजय अलंग, अध्यक्ष वीर अजीत कुमार शर्मा तथा कवयित्री पूनम माटिया ने दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में दिल्ली की सुप्रसिद्ध कवयित्री पूनम माटिया, पटना की डॉ. प्रीति सुमन, जबलपुर के बसंत कुमार शर्मा, रायबरेली के डॉ. गोविंद ‘गजब’ सहित अन्य रचनाकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम में रायपुर एवं आसपास के स्थानीय रचनाकारों को ओपन माइक के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला। वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार राजकुमार धर द्विवेदी, गजलकार सुदेश मेहर तथा कवयित्री ममता खरे ‘मधु’ ने भी काव्य पाठ कर खूब वाहवाही बटोरी।
लहरे को ‘श्रेष्ठ पत्रकार 2026’ सम्मान
साहित्य के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और साहित्य सृजन संस्थान के कार्यक्रमों के समाचारों को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे ‘साहिल’ को संस्था की ओर से ‘श्रेष्ठ पत्रकार 2026’ सम्मान से अलंकृत किया गया। संस्था के अध्यक्ष एवं उपस्थित कवियों ने उन्हें शाल एवं सम्मान प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इसी क्रम में सारंगढ़ की सामाजिक कार्यकर्ता हीरा देवी निराला को सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। दोनों सम्मानित व्यक्तित्वों के प्रति उपस्थित साहित्यकारों ने शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
‘अक्स जिंदगी के’ का हुआ विमोचन
समारोह में साहित्यकार एवं कवयित्री ममता खरे ‘मधु’ के गीत संग्रह ‘अक्स जिंदगी के’ का अतिथियों के करकमलों से विमोचन किया गया। पुस्तक के विमोचन को साहित्य प्रेमियों ने आयोजन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
कविताओं ने जगाई चेतना
कवि सम्मेलन में कवियों ने प्रेम, सामाजिक सरोकार, रिश्तों, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं। पूनम माटिया ने अपनी रचना में बदलते सामाजिक परिवेश पर सवाल उठाते हुए कहा—
“आज दिल में और घरों में कुछ जगह छोड़ी नहीं,
इक जमाना था कि जब हर घर में रोशनदान थे।”
वहीं ममता खरे ‘मधु’ ने बारिश और यादों को भावनाओं से जोड़ते हुए सुनाया—
“वो बारिश की बूंदें हैं दिल को लुभाती,
वो भीगी सी यादें हैं हलचल मचाती।
अगर गम में भीगी हो मन की चदरिया,
तो देकर फुहारें कुहासा मिटाती।”
डॉ. गोविंद ‘गजब’ की पंक्तियों ने भी श्रोताओं को खूब गुदगुदाया—
“पत्थर दिल वाले मखमल हो जाते हैं,
प्रिय की आंखों का काजल हो जाते हैं।
प्यार जो करते हैं वो प्यार निभाने में,
थोड़े-थोड़े से पागल हो जाते हैं।”
बसंत कुमार शर्मा ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन और संघर्ष का संदेश दिया। वहीं डॉ. प्रीति सुमन ने सीता के चरित्र और भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखकर काव्य पाठ किया। गजलकार सुदेश मेहर की पंक्तियां—
“गीत तुम पर लिखे थे जो मैंने,
हल्दी अक्षत अबीर हो गए हैं।
लफ्ज मीरा हुए हैं मेरे सब,
और मिसरे कबीर हो गए हैं।”
ने भी खूब तालियां बटोरीं।
चार घंटे तक चला काव्य पाठ
दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक चले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को साहित्य, संस्कृति, प्रेम, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों से जोड़े रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीर अजीत कुमार शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में आकाशवाणी रायपुर के वरिष्ठ उद्घोषक प्रकाश उदय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन उमेश कुमार सोनी ने किया।
समारोह के समापन अवसर पर साहित्य सृजन संस्थान की ओर से सम्मेलन में पहुंचे सभी कवियों को शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि साहित्य और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने तथा नवोदित रचनाकारों को मंच देने के उद्देश्य से ऐसे आयोजन आगे भी निरंतर किए जाएंगे।




